Thursday, January 8, 2026

प्रेम प्रसंग बना मौत की वजह, युवक की बेरहमी से पिटाई के बाद मौत।

हिम न्यूज़ टुडे

हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू और मंडी की सीमा पर स्थित गाड़ागुशैणी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। प्रेमिका से मिलने आए एक युवक की कुछ लोगों ने बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे उसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

चंडीगढ़ से टैक्सी में आया था युवक
जानकारी के अनुसार मृतक युवक की पहचान दीपक कुमार झा (21) निवासी बिहार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि दीपक बुधवार को अपनी कथित प्रेमिका से मिलने के लिए चंडीगढ़ से हरियाणा नंबर की टैक्सी लेकर हिमाचल प्रदेश पहुंचा था। इसी दौरान वह कुल्लू जिला के बंजार क्षेत्र के जिभी के पास पहुंचा, जहां कुछ लोगों ने उसे घेर लिया।

जिभी के पास बेरहमी से की गई पिटाई
आरोप है कि आरोपियों ने युवक के साथ जमकर मारपीट की, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। मारपीट के बाद युवक की हालत बिगड़ती चली गई। स्थानीय लोगों की मदद से उसे देर रात जिला अस्पताल कुल्लू पहुंचाया गया।जिला अस्पताल कुल्लू में डॉक्टरों ने युवक को बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के चलते उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच तेज
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने इस संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मामले में कुछ लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है।

एसपी कुल्लू का बयान
पुलिस अधीक्षक कुल्लू मदन लाल कौशल ने बताया कि युवक की मौत मारपीट के बाद हुई है। पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रेम प्रसंग से जुड़ा हो सकता है मामला
प्रारंभिक जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है, हालांकि पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाएगी।

Saturday, October 25, 2025

छठ पूजा : प्रकृति, सूर्य और आस्था :--- जाने आखिर क्या है छठ पर्व----

छठ पूजा : प्रकृति, सूर्य और आस्था का महान पर्व

छठ पूजा भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है, जो सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित होता है। यह पर्व मुख्यतः बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े ही श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया जाता है। धीरे-धीरे यह पर्व देश के अन्य हिस्सों में भी लोकप्रिय हो गया है। छठ पूजा सूर्य उपासना और जल व प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक मानी जाती है।

छठ पूजा का महत्व

छठ पूजा का संबंध सूर्य देव और छठी मैया से है। सूर्य देव को ऊर्जा, स्वास्थ्य और जीवन का आधार माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि छठी मैया (उषा और प्रत्यूषा — सूर्य की दोनों पत्नियाँ) की उपासना से संतान सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की रक्षा होती है।

वैज्ञानिक दृष्टि से भी यह पर्व महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें सूर्य की सीधी उपासना की जाती है, जिससे शरीर को विटामिन डी प्राप्त होता है और मानसिक शांति मिलती है।

छठ पूजा का उल्लेख महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। कहा जाता है कि जब भगवान राम अयोध्या लौटे, तब माता सीता ने सूर्य देव की उपासना कर उनके आशीर्वाद से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की थी। इसी तरह, द्रौपदी ने भी छठ का व्रत रखकर पांडवों के कल्याण की प्रार्थना की थी।

छठ पूजा कैसे मनाई जाती है

छठ पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें कठोर नियमों और पवित्रता का पालन किया जाता है।

पहला दिन – नहाय-खाय:
व्रती (जो व्रत रखती हैं) सुबह पवित्र स्नान कर घर की सफाई करती हैं और शुद्ध भोजन बनाती हैं। इस दिन अरवा चावल, लौकी की सब्जी और चने की दाल खाई जाती है।

दूसरा दिन – खरना:    इस दिन व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, रोटी और फल खाकर व्रत खोलती हैं। इसके बाद अगले 36 घंटे का निर्जला उपवास आरंभ होता है।

तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य:    व्रती और परिवार के सदस्य नदी, तालाब या घाट पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य (डूबते सूर्य) को अर्घ्य अर्पित करते हैं। घाटों पर गीत, भजन और दीपों की रोशनी से वातावरण भक्तिमय हो उठता है।

चौथा दिन – उषा अर्घ्य:    अंतिम दिन प्रातःकाल उदयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है और छठी मैया से परिवार की समृद्धि, स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद व्रत का समापन किया जाता है।

छठ पूजा के नियम और विधान:-     छठ का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। इसमें 36 घंटे का निर्जला उपवास रखा जाता है, जिसमें पानी तक नहीं पिया जाता। व्रत करने वाले व्रती को शुद्धता, संयम और सात्विकता का पालन करना होता है। प्रसाद में ठेकुआ, केले, नारियल, शकरकंद और गन्ना शामिल होते हैं। पूजा में मिट्टी के दीये, सूप, बांस की टोकरी और फल विशेष महत्व रखते हैं।

कौन मनाता है छठ पूजा:--    छठ पर्व मूल रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की परंपरा रही है, लेकिन आज यह संपूर्ण भारत में मनाया जाता है। मुंबई, दिल्ली, पंजाब, हिमाचल और हरियाणा जैसे राज्यों में भी प्रवासी परिवारों के माध्यम से छठ पूजा का विस्तार हुआ है।

Thursday, August 28, 2025

एम्स बिलासपुर ने महिला को दी नई जिंदगी: 30 साल पुराने बर्न कॉन्ट्रैक्चर से पीड़ित महिला की सफल सर्जरी #एम्स

घुमारवीं:-

HimNews Today

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बिलासपुर के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने एक असाधारण उपलब्धि हासिल की है। यहां तीन दशकों से बर्न कॉन्ट्रैक्चर (जलन से त्वचा सिकुड़ने की गंभीर समस्या) से जूझ रही एक महिला का सफल ऑपरेशन किया गया। यह केवल चिकित्सीय उपलब्धि ही नहीं, बल्कि उस महिला के जीवन में आत्मविश्वास और सामाजिक पुनर्स्थापना का नया अध्याय है।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता की गर्दन पूरी तरह जकड़ी हुई थी, जिससे उसकी सामान्य दिनचर्या और सामाजिक जीवन दोनों प्रभावित थे। आर्थिक तंगी के चलते वह वर्षों तक इलाज नहीं करवा सकी। लेकिन एम्स बिलासपुर पहुंचने पर उसे आयुष्मान भारत और हिम केयर योजनाओं के तहत निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया।

वही प्लास्टिक सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ डॉ. नवनीत शर्मा ने बताया कि  सर्जरी के दौरान कई तकनीकी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन प्लास्टिक सर्जरी टीम और एनेस्थीसिया विभाग ने मिलकर सभी जोखिमों को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।

एम्स बिलासपुर के कुल सचिव डॉ. राकेश कुमार सिंह ने कहा कि संस्थान केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं ही नहीं, बल्कि करुणामयी और संवेदनशील उपचार प्रदान करने के लिए भी प्रतिबद्ध है।

Wednesday, December 25, 2024

सरस्वती विद्या मंदिर बाल वाटिका घुमारवीं में बच्चो ने मनाया तुलसी पूजन दिवस

सरस्वती विद्या मंदिर बाल वाटिका घुमारवीं में तुलसी पूजन दिवस का आयोजन

HimNews Today
25-12-2024
घुमारवीं स्थित सरस्वती विद्या मंदिर बाल वाटिका में बुधवार को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ तुलसी पूजन दिवस मनाया गया। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने पारंपरिक तरीके से तुलसी का पूजन किया और भारतीय संस्कृति के इस महत्वपूर्ण पक्ष को आत्मसात किया।
विद्यालय की शिक्षको ने  तुलसी के महत्व और उसके औषधीय एवं धार्मिक गुणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि तुलसी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में "मां तुलसी" के रूप में पूजनीय है। यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और आध्यात्मिकता का प्रतीक है।

कार्यक्रम में बच्चों को तुलसी से जुड़े कई रोचक तथ्य बताए गए। शिक्षकों ने तुलसी के औषधीय गुणों और पर्यावरण संरक्षण में इसके महत्व पर भी चर्चा की। बच्चों को तुलसी के पौधे घर में लगाने और उसकी देखभाल करने की प्रेरणा दी गई।


प्रेम प्रसंग बना मौत की वजह, युवक की बेरहमी से पिटाई के बाद मौत।

हिम न्यूज़ टुडे हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू और मंडी की सीमा पर स्थित गाड़ागुशैणी क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। प्रेमिक...